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सरकार ने वन नेशन वन राशन कार्ड (One Nation One Ration Card) अभियान के तहत नया Ration कार्ड पेश किया है। One Nation One Ration Card योजना के ...
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नई दुनिया: दुनिया में कई अजीबोगरीब नजारे हैं जिसके पीछे का रहस्य (Mysterious Shivling) अब तक उलझा है। भगवान शिव (Lord Shiva) का हिंदू धर्म म...
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नई दुनिया: नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose) की 23 जनवरी को 125वीं जयंती है। इस बार नेताजी की जयंती को बड़े स्तर पर मनाने...
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माता शबरी बोली- यदि रावण का अंत नहीं करना होता तो राम तुम यहाँ कहाँ से आते?" राम गंभीर हुए। कहा, "भ्रम में न पड़ो माता! राम क्या रा...
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दक्षिण भारत का वह कॉमेडियन , जिसे गिनीज बुक से भी मिल चुका है सम्मान दक्षिण भारत के लोकप्रिय कॉमेडियन ब्रह्मानंदम ने बनाई भगवान वेंकटेश्वर क...
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देश के सशस्त्र बलों को तेजी से आधुनिक बनाने में जुटे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ऐसी एक खतरनाक राइफल तैयार कर ली है। जो एक मिनट...
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दीपावली का त्योहार आने वाला है, लेकिन दीपावली से पहले धनतेरस का त्योहार आता है। जिसका मह्त्व हिन्दू संस्कृति में बहुत बड़ा है। हर साल कार्ति...
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यह तमिलनाडु का बृहदेश्वर मंदिर है, यह बिना नींव का मंदिर है । इसे इंटरलॉकिंग विधि का उपयोग करके बनाया गया है इसके निर्माण में पत्थरों के बीच...
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हर 12 साल में महाप्रभु की मूर्ती को बदला जाता है, उस समय पूरे पुरी शहर में ब्लैकआउट किया जाता है यानी पूरे शहर की लाइट बंद की जाती है। लाइट ...
Thursday, July 9, 2020
कानपुर में 8 पुलिस कर्मियों को मारने वाला विकास दुबे गिरफ्तार।
Wednesday, July 8, 2020
"तिरंगा लहराकर आऊंगा या तिरंगे में लिपटकर आऊंगा,लेकिन आऊंगा जरूर".विक्रमबत्रा जी को नमन।
Tuesday, July 7, 2020
39 वा जन्मदिन मना रहे महेंद्र सिंह धोनी को जन्मदिन की शुभकामनाएं।
महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 07 जुलाई 1981 को बिहार के राची सहर में हुआ था। उनके पिता का नाम पान सिंह और माता का नाम देवकी है। धोनी के एक भाई नरेंद्र और एक बहन जयंती है। ऐसे तो धौनी का घर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के लावली हैं। महेंद्र सिंह धोनी आज भले क्रिकेटर के रूप में जाने जाते हैं लेकिन उन्हें फुटबाल और बैडमिंटन खेलना बहुत पसंद था। फुटबॉल में वह गोल कीपिंग करते थे। फुटबॉल टीम के कोच ने उन्हें क्रिकेट खेलने के सलाह दी। धोनी छोटी उम्र में ही डिस्टिक और क्लब लेवल पर फुटबॉल खेलना स्टार्ट कर दिए थे। उनका फुटबॉल के गोलकीपिंग में अच्छा प्रदर्शन देख फुटबॉल के कोच ने उन्हें क्रिकेट खेलने को कहा। धोनी ने उससे पहले क्रिकेट नहीं खेले थे। क्रिकेट में धोनी ने विकेटकीपर से अपनी कैरियर की शुरुआत की। धोनी की विकेटकीपिंग काफी अच्छी रही। अपने विकेट कीपिंग योग्यता और जुझारूपन से कमांडो क्रिकेट क्लब के अस्थाई सदस्य बन गए। 1997 98 में वीनू मनकद ट्रॉफी के लिए चुना गया। महेंद्र सिंह धोनी सचिन और एडम गिलक्रिस्ट गेम बहुत बड़े फैन है।
महेंद्र सिंह धोनी विश्व क्रिकेट में एक अनूठा मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलताओं को देखते हुये उन्हें पद्म भूषण, पद्म श्री और राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। माही के नाम से लोकप्रिय धोनी आईसीसी की तीनों विश्व प्रतियोगिताएं जीतने वाले इकलौते कप्तान है।
धोनी भारतीय और विश्व क्रिकेट दोनों के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में से एक हैं। वह सभी ICC स्पर्धाओं (वर्ल्ड T20 2007, ICC टेस्ट मेस 2009, विश्व कप 2011, और चैंपियंस ट्रॉफी 2013) जीतने वाले एकमात्र कप्तान हैं। उन्होंने 2010 और 2016 (T20I प्रारूप) में दो एशिया कप जीत के लिए 'मेन इन ब्लू' का नेतृत्व किया।महान क्रिकेटर को आखिरी बार पिछले साल जुलाई में न्यूजीलैंड के हाथों विश्व कप 2019 के सेमीफाइनल में हार के दौरान एक्शन में देखा गया था, जहां उन्होंने 72 गेंदों में 50 रन की तूफानी पारी खेली थी।
आज वह अपना 39 वां जन्मदिन मना रहे हैं, उनके जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाएं।
Monday, July 6, 2020
गलवान घाटी में भारत की हुई जीत चीन हुआ पीछे।
Sunday, July 5, 2020
पर्व गुरु पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है, आइए जानते हैं इसका रहस्य।
अखंड मंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरं, तत्पदंदर्शितं एनं तस्मै श्री गुरुवे नम:
अर्थात यह श्रृष्टि अखंड मंडलाकार है। बिंदु से लेकर सारी सृष्टि को चलाने वाली अनंत शक्ति का, जो परमेश्वर तत्व है, वहां तक सहज संबंध है। इस संबंध को जिनके चरणों में बैठ कर समझने की अनुभूति पाने का प्रयास करते हैं, वही गुरु है। जैसे सूर्य के ताप से तपती भूमि को वर्षा से शीतलता और फसल पैदा करने की ताकत मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में शिष्यों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है।
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन सनातन धर्म में गुरु पूजा का विधान है। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरंभ में आती है। इस दिन से चार महीने तक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं।अध्ययन के लिए अगले चार महीने उपयुक्त माने गए हैं। पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का स्वरूप बहुत कुछ बदला हुआ है। कोरोना संक्रमण के कारण गुरु वंदना भी ऑनलाइन हो रही है। समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता के शीर्ष पर बैठे लोग अपने-अपने तरीके से गुरु को याद कर रहे हैं।भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान देवताओं से भी ऊपर माना गया है। संत कबीर अपने दोहे
"इस गुुुुुुरू पूर्णिमा के अवसर पर हम उन सब गुरु को नमन करते हैं, जिन्होंने हमें अंधकार से प्रकाशमय की ओर अग्रसर किया !"
Saturday, July 4, 2020
हिंदुत्व और हिंदुस्तान के वास्तविक स्वरूप से विश्व को अवगत कराने वाले युग प्रवर्तक स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन।
मेरे अमरीकी भाइयो और बहनो!
आपने जिस सौहार्द और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया हैं उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण हो रहा हैं। संसार में संन्यासियों की सबसे प्राचीन परम्परा की ओर से मैं आपको धन्यवाद देता हूँ; धर्मों की माता की ओर से धन्यवाद देता हूँ; और सभी सम्प्रदायों एवं मतों के कोटि कोटि हिन्दुओं की ओर से भी धन्यवाद देता हूँ।
🤔 बहुमुखी प्रतिभा के धनी स्वामीजी का शैक्षिक प्रदर्शन औसत था। उनको यूनिवर्सिटी एंट्रेंस लेवल पर 47 फीसदी, एफए में 46 फीसदी और बीए में 56 फीसदी अंक मिले थे।
🤔 विवेकानंद चाय के शौकीन थे। उन दिनों जब हिंदू पंडित चाय के विरोधी थे, उन्होंने अपने मठ में चाय को प्रवेश दिया। एक बार बेलूर मठ में टैक्स बढ़ा दिया गया था। कारण बताया गया था कि यह एक प्राइवेट गार्डन हाउस है। बाद में ब्रिटिश मजिस्ट्रेट की जांच के बाद टैक्स हटा दिए गए।
🤔 एक बार विवेकानंद ने महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक को बेलूर मठ में चाय बनाने के लिए मनाया। गंगाधर तिलक अपने साथ जायफल, जावित्री, इलायची, लॉन्ग और केसर लाए और सभी के लिए मुगलई चाय बनाई।
🤔 उनके मठ में किसी महिला, उनकी मां तक, को जाने की अनुमति नहीं थी। एक बार जब उनको काफी बुखार था तो उनके शिष्य उनकी मां को बुला लाए। उनको देखकर विवेकानंद चिल्लाए, 'तुम लोगों ने एक महिला को अंदर आने की अनुमति कैसे दी? मैं ही हूं जिसने यह नियम बनाया और मेरे लिए ही इस नियम को तोड़ा जा रहा है।
🤔 पिता की मृत्यु के बाद उनके परिवार पर संकट आ गया था। गरीबी के उन दिनों में सुबह विवेकानंद अपनी माता से कहते थे कि उनको कहीं से दिन के खाने के लिए निमंत्रण मिला है और घर से बाहर चले जाते थे। असल में उनको कोई निमंत्रण नहीं मिलता था बल्कि वह ऐसा इसिलए करते थे ताकि घर के अन्य लोगों को खाने का ज्यादा हिस्सा मिल सके। वह लिखते हैं, 'कभी मेरे खाने के लिए बहुत कम बचता था और कभी तो कुछ भी नहीं बचता था। बीए डिग्री होने के बावजूद नरेंद्रनाथ (विवेकानंद का असल नाम) को रोजगार की तलाश में घर-घर जाना पड़ता था। वह जोर से कहते, 'मैं बेरोजगार हूं।' नौकरी की तलाश में जब थक गए तो उनका भगवान से भरोसा उठ गया और लोगों से कहने लगते कि भगवान का अस्तित्व नहीं है।
Friday, July 3, 2020
प्रधानमंत्री के लेह दौरे के बाद आया कांग्रेस की प्रतिक्रिया।
मैं तो इंसानियत से मजबूर था तुम्हे बीच मे नही डुबोया" मगर तुमने मुझे क्यों काट लिया!
नदी में बाढ़ आती है छोटे से टापू में पानी भर जाता है वहां रहने वाला सीधा साधा1चूहा कछुवे से कहता है मित्र "क्या तुम मुझे नदी पार करा ...
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